परिचय एवं स्थापना
उलमा सेल्फ केयर फोरम यानी USCF की शुरुआत 7 जुलाई 2026 को हुई है। यह फोरम मदरसों, मस्जिदों में सेवा करने वाले उस्तादों, इमामों और मुअज्जिनों के साथ-साथ व्यापार करने वाले उलमा-ए-किराम के लिए है।
मदरसों, खास तौर पर प्राइवेट संस्थानों के उस्तादों और मस्जिदों के इमाम हज़रात की कम तनख्वाह की समस्या किसी से छुपी हुई नहीं है। अक्सर उलमा अपनी तनख्वाह से घर की बुनियादी ज़रूरतें भी पूरी नहीं कर पाते। इसके अलावा अगर बेटी की शादी का समय आ जाए, या खुदा न करे कोई जानलेवा बीमारी लग जाए, या किसी झूठे केस में उनकी गिरफ्तारी हो जाए तो उनकी परेशानी और बढ़ जाती है। इसी तरह अगर उनका इंतकाल हो जाए तो बूढ़े माँ-बाप, यतीम बच्चे, विधवा पत्नी, भाई-बहन बिल्कुल बेसहारा हो जाते हैं।
इसी परेशानी को कम करने के लिए USCF बनाया गया है। आइए इस हदीस-ए-मुस्तफाﷺ की जीती-जागती मिसाल बनें !
الْمُؤْمِنُ لِلْمُؤْمِنِ كَالْبُنْيَانِ، يَشُدُّ بَعْضُهُ بَعْضًا
मोमिन दूसरे मोमिन के लिए इमारत की तरह है, जिसका एक हिस्सा दूसरे को मज़बूती देता है।
(2) संगठन का मकसद
- इंतकाल पर मदद: उलमा-ए-किराम में से किसी सक्रिय सदस्य (Active Member) के इंतकाल पर उसके घर वालों की आर्थिक मदद करना।
- बेटी की शादी पर मदद: सक्रिय सदस्य (Active Member) की बेटी की शादी पर सभी सदस्य मिल कर मदद करेंगे।
- कानूनी मदद: खुदा न करे अगर कोई सक्रिय सदस्य (Active Member) किसी झूठे मुकदमे में फँस जाए तो सदस्य कानूनी मदद के लिए चंदा देंगे।
- गंभीर बीमारी पर मदद: अगर कोई सक्रिय सदस्य (Active Member) किसी गंभीर जानलेवा बीमारी में पड़ जाए तो सदस्य इलाज के लिए मदद करेंगे।
- उलमा को जोड़ना और मुश्किल समय में साथ देना।
- ज़रूरतमंद मदरसों और दीनी संस्थानों की मदद करना।
(3) सदस्य बनने की शर्तें
- उम्र: 18 से 60 साल।
- पेशा: वो उलमा-ए-किराम जो किसी दीनी इदारे के मुदर्रिस हों, या किसी मस्जिद के इमाम व मुअज्जिन हों या कोई जायज़ व्यापार करते हों।
- रजिस्ट्रेशन: https://uscf.in पर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन।
- सालाना प्रशासनिक फीस: 51 रुपये। यह रकम वापस नहीं होगी।
(4) सदस्य के प्रकार और उनके अधिकार
(अ) प्रतीक्षारत सदस्य (Waiting Member)
परिभाषा: रजिस्ट्रेशन के बाद 365 दिन पूरे कर रहा है।
मदद का हक: कोई मदद नहीं मिलेगी।
(ब) सक्रिय सदस्य (Active Member)
परिभाषा: 365 दिन पूरे + 90 प्रतिशत सहायता अभियानों में सहयोग ज़रूरी।
मदद का हक: चारों मदद का हकदार होगा: इंतकाल, शादी, बीमारी, कानूनी केस।
(स) निष्क्रिय सदस्य (In-Active Member)
परिभाषा: पहले सक्रिय था मगर अब सहयोग छोड़ दिया।
मदद का हक: कोई मदद नहीं मिलेगी जब तक 3 महीने लगातार सहयोग न करे।
- खास छूट: पहले 1100 सदस्य रजिस्ट्रेशन करते ही “सक्रिय सदस्य (Active Member)” बन जाएंगे। उन्हें 365 दिन इंतजार नहीं करना होगा। लेकिन बेटी की शादी में मदद के लिए इन 1100 सदस्यों को भी 365 दिन पूरे करना ज़रूरी है।
(5) Active Member बनने का तरीका – लॉक-इन पीरियड
- आम नियम: Waiting Member को 1 साल / 365 दिन तक हर महीने की मदद में हिस्सा लेना होगा। उसके बाद वो “Active Member” बन जाएगा।
- 90 प्रतिशत शर्त: Active Member बने रहने के लिए साल भर के 90 प्रतिशत सहायता अभियानों में सहयोग करना जरूरी है। अगर कोई Active Member 90 प्रतिशत सहयोग पूरा नहीं करता तो वो “In-Active Member” हो जाएगा।
- In-Active से Active: अगर कोई Member In-Active Member हो जाए तो दोबारा Active Member बनने के लिए लगातार 3 महीने सहयोग करना होगा और 90 दिन पूरे करने होंगे।
(6) मदद का तरीका
- मदद की रकम: मदद 50 रुपये से शुरू होगी। महंगाई और हालात को देखते हुए संस्था सहयोग की रकम में कमी-बेशी कर सकती है। मिसाल: अगर 2000 Active Member हो गए तो 2000 × 50 = 1 लाख रुपये की मदद हो जाएगी।
- महीने में एक मदद: हर महीने सिर्फ एक केस के लिए मदद मांगी जाएगी।
- ज्यादा केस होने पर: अगर एक महीने में एक से ज्यादा केस हो जाएं तो बाकी केस अगले महीने “आगे-पीछे” करके निपटाए जाएंगे।
- ग्रुपबंदी: जब Member बहुत ज्यादा हो जाएंगे तो संस्था ग्रुप बना देगी। हर ग्रुप बारी-बारी मदद करेगा।
- जरूरतमंद को रकम कैसे मिलेगी: हर Member तयशुदा रकम सीधे जरूरतमंद Active Member के वारिस या खुद Member के बैंक अकाउंट में भेजेगा।
- रसीद अपलोड करना: रकम भेज कर वेबसाइट पर ट्रांजैक्शन की रसीद अपलोड करना जरूरी है।
(7) मदद की 4 किस्में
अहम नोट: मदद की चारों किस्में सिर्फ Active Member के लिए हैं;
अ: इंतकाल पर
शर्त: Member का “Active” होना जरूरी
नोट: 60 साल के बाद इंतकाल पर मदद नहीं मिलेगी।
Active Member के इंतकाल पर मदद कैसे होगी?
(7 अ 1) बुनियादी शर्तें
- अ: मरहूम का Active Member होना जरूरी है।
- ब: इंतकाल के वक्त Member की उम्र 60 साल से कम होनी चाहिए। 60 साल पूरे होने के बाद इंतकाल पर मदद नहीं मिलेगी।
- स: Member ने पिछले 12 महीने में 90 प्रतिशत सहायता अभियानों में सहयोग किया हो।
(7 अ 2) मदद की रकम और हद
- अ: मदद 50 रुपये प्रति Active Member के हिसाब से अपील की जाएगी।
- ब: मिसाल: अगर 2000 Active Member हैं तो 2000 × 50 = 1 लाख रुपये की अपील होगी।
- स: ज्यादा से ज्यादा एक केस में 2,50,000 रुपये तक की अपील की जाएगी।
- द: अहम नोट: इंतकाल की सूरत में भी USCF सिर्फ Members से अपील करता है। मदद की आखिरी रकम की कोई गारंटी नहीं देता। जितने Active Member सहयोग करेंगे उतनी ही रकम वारिस को मिलेगी। अगर 50% Member भी सहयोग न करें तो रकम बहुत कम हो सकती है।
(7 अ 3) मदद का तरीका
- अ: इत्तिला देना: वारिस या संबंधित Member 7 दिन के अंदर USCF को व्हाट्सएप, ईमेल या हेल्पलाइन पर इत्तिला दे।
- ब: दस्तावेज: नीचे दिए गए कागजात संस्था को भेजना जरूरी है:
- डेथ सर्टिफिकेट
- मरहूम का USCF Membership कार्ड / ID
- वारिस का पहचान पत्र और बैंक पासबुक
- नॉमिनी लोगों की डिटेल अगर Member ने दी हो
- स: तस्दीक: USCF की टीम 3 से 7 दिन में तस्दीक करेगी।
- द: अपील जारी करना: तस्दीक के बाद सभी Active Members को 50 रुपये भेजने की अपील जारी की जाएगी।
- ह: रकम जमा करना: हर Member तयशुदा रकम सीधे वारिस के बैंक अकाउंट में भेजेगा।
- व: रसीद अपलोड: रकम भेज कर हर Member https://USCF.in पर ट्रांजैक्शन की रसीद अपलोड करेगा।
(7 अ 4) वारिस कौन होगा ?
- अ: Member ने रजिस्ट्रेशन के वक्त जो 2 नॉमिनी लिखे हैं, उन्हीं को वारिस माना जाएगा।
- ब: अगर नॉमिनी लोगों में झगड़ा हो तो संस्था का फैसला अंतिम होगा।
- स: अगर Member ने कोई नॉमिनी नहीं लिखा तो शरई वारिसों में रकम बांटी जाएगी।
(7 अ 5) किन सूरतों में मदद नहीं मिलेगी ?
- अ: अगर इंतकाल के वक्त Member In-Active Member या Waiting Member था।
- ब: अगर Member की उम्र 60 साल से ज्यादा थी।
- स: अगर Member ने खुदकुशी की हो।
- द: अगर वारिस के जुर्म की वजह से Member का इंतकाल हुआ हो।
- ह: अगर Member ने 90 प्रतिशत सहयोग की शर्त पूरी न की हो।
(7 अ 6) रकम की गारंटी से मुताल्लिक ऐलान
- अ: मदद की चारों सूरतों में – इंतकाल, शादी, बीमारी, झूठा मुकदमा – USCF सिर्फ Members से अपील करता है।
- ब: मदद की रकम कम या ज्यादा होने की कोई गारंटी नहीं है। जितने Active Member सहयोग करेंगे उतनी ही रकम वारिस को मिलेगी।
- स: USCF रकम जमा करने का जिम्मेदार नहीं है, सिर्फ अपील का प्लेटफॉर्म है।
(7 अ 7) गलत रकम की वापसी
- अ: अगर किसी Member ने गलती से ज्यादा रकम भेज दी तो सबूत देने पर वारिस वो रकम 3 कारोबारी दिन में वापस करेगा।
- ब: मदद लेने से पहले वारिस को USCF के पास हलफनामा जमा करना जरूरी है।
(7 अ 8) अहम नोट
- अ: हर महीने सिर्फ एक केस के लिए मदद मांगी जाएगी। अगर एक महीने में एक से ज्यादा इंतकाल हो जाएं तो बाकी केस अगले महीने निपटाए जाएंगे।
- ब: जब Member बहुत ज्यादा हो जाएंगे तो संस्था ग्रुप बना देगी। हर ग्रुप बारी-बारी मदद करेगा।
- स: सभी मामलों में संस्था का फैसला अंतिम होगा। उसे अदालत में चैलेंज नहीं किया जा सकता।
- द: किसी भी कानूनी झगड़े का फैसला सिर्फ जिला गोरखपुर की अदालत में होगा।
USCF के इस सहायता अभियान का मकसद है कि किसी आलिम-ए-दीन के इंतकाल के बाद उसके वारिस बेसहारा न रहें।
ब: बेटी की शादी
शर्त: Member का “Active” होना + 365 दिन पूरे
नोट: पहले 1100 Member के लिए भी 365 दिन गुजारना जरूरी है।
Active Member की बेटी की शादी में मदद कैसे होगी ?
(7 ब 1) बुनियादी शर्तें
- अ: Member का Active Member होना जरूरी है।
- ब: Member ने लगातार 365 दिन पूरे किए हों। पहले 1100 Member के लिए भी 365 दिन जरूरी हैं।
- स: Member ने पिछले 12 महीने में 90 प्रतिशत सहायता अभियानों में सहयोग किया हो।
- द: मदद सगी बेटी की शादी पर मिलेगी।
- ह: बेटी की उम्र 18 साल से ज्यादा होनी चाहिए।
- व: Member की उम्र 60 साल से कम हो।
(7 ब 2) बहन की शादी में मदद – खास छूट
- अगर किसी आलिम-ए-दीन के वालिदैन का इंतकाल हो चुका है या वालिदैन की उम्र 60 साल हो चुकी है और इस आलिम की बहन उसी के ज़ेर-ए-किफालत है यानी बहन की देखभाल, खर्च की जिम्मेदारी इसी आलिम पर है तो ऐसी सूरत में इस बहन की शादी में भी USCF मदद करेगा।
- बहन की उम्र 18 साल से ज्यादा होना जरूरी है।
- बहन के ज़ेर-ए-किफालत होने का सबूत देना होगा: वालिदैन का डेथ सर्टिफिकेट या उम्र का सबूत + 2 Active Member की गवाही
(7 ब 3) मदद की रकम और हद
- अ: मदद 50 रुपये प्रति Active Member के हिसाब से अपील की जाएगी।
- ब: एक शादी में ज्यादा से ज्यादा 2,50,000 रुपये तक की अपील की जाएगी।
- स: अहम नोट: USCF सिर्फ Members से अपील करता है। मदद की आखिरी रकम की कोई गारंटी नहीं देता। जितने Member सहयोग करेंगे उतनी ही रकम मिलेगी।
(7 ब 4) एक Member को कितनी बार मदद मिलेगी
- अ: आम हालत में एक Active Member को सिर्फ 1 बेटी की शादी में मदद मिलेगी।
- ब: खास छूट 1: अगर कोई आलिम-ए-दीन अपनी पत्नी को भी USCF से जोड़ता है और वो भी Active Member बन जाती हैं, तो ऐसी सूरत में दूसरी बेटी की शादी में भी मदद की जाएगी।
- स: खास छूट 2: अगर Member की बहन उसके ज़ेर-ए-किफालत है और ऊपर दी गई शर्त पूरी होती है तो इस बहन की शादी में भी मदद मिलेगी।
- द: दो शादियों के बीच कम से कम 2 साल का वक्फा जरूरी है।
- ह: एक Member को जिंदगी में ज्यादा से ज्यादा 2 शादियों की मदद मिल सकती है – चाहे वो 2 बेटियां हों या 1 बेटी + 1 बहन।
(7 ब 5) दरख्वास्त देने का तरीका
- अ: वक्त: शादी की तारीख से कम से कम 60 दिन पहले दरख्वास्त देना जरूरी है।
- ब: दस्तावेज: ये कागजात USCF को भेजना जरूरी हैं:
- बेटी/बहन का निकाहनामा / शादी कार्ड
- बेटी/बहन का आधार कार्ड या बर्थ सर्टिफिकेट – उम्र 18+ का सबूत
- Member का पहचान पत्र + बैंक पासबुक
- 2 Active Member की लिखित गवाही
- बहन की सूरत में: वालिदैन का डेथ सर्टिफिकेट या उम्र का सबूत + ज़ेर-ए-किफालत का हलफनामा
- अगर दूसरी बेटी की मदद चाहिए तो पत्नी का USCF Active Membership कार्ड
- स: अगर किसी महीने 50% Member भी सहयोग न करें तो रकम बहुत कम हो सकती है। इसकी जिम्मेदारी USCF की नहीं होगी।
(7 ब 7) गलत दावे पर कार्रवाई
- अ: अगर कोई Member जाली शादी कार्ड या झूठे कागज लगा कर मदद लेता है तो Membership फौरन खत्म होगी।
- ब: ली गई रकम 7 दिन में वापस करनी होगी वरना USCF कानूनी कार्रवाई करेगा।
- स: तस्दीक करने वाले 2 Member की Membership भी खत्म हो सकती है अगर वो जानबूझ कर गलत गवाही दें।
(7 ब 8) संस्था का फैसला अंतिम
- अ: सभी दस्तावेज की जांच और फैसला USCF की कमेटी करेगी।
- ब: कमेटी के फैसले को अदालत में चैलेंज नहीं किया जा सकता।
- स: किसी भी झगड़े का फैसला सिर्फ जिला गोरखपुर की अदालत में होगा।
USCF के इस सहायता अभियान का मकसद है कि किसी आलिम-ए-दीन की बेटी या ज़ेर-ए-किफालत बहन सिर्फ पैसे की कमी से बिना ब्याही न रहे।
स: गंभीर बीमारी
शर्त: Member का “Active” होना + मेडिकल रिपोर्ट
नोट: संस्था की जांच के बाद ही सहायता अभियान चलाया जाएगा।
गंभीर बीमारी में मदद कैसे होगी ?
(7 स 1) बुनियादी शर्तें
- अ: मरीज का Active Member होना जरूरी है।
- ब: Member ने पिछले 12 महीने में 90 प्रतिशत सहायता अभियानों में सहयोग किया हो।
- स: बीमारी जानलेवा या ऐसी हो जिसका इलाज बहुत महंगा हो। आम बुखार, खांसी, जुकाम पर मदद नहीं मिलेगी।
- द: Member की उम्र 60 साल से कम हो। 60 साल के बाद गंभीर बीमारी पर मदद नहीं मिलेगी।
(7 स 2) कौन सी बीमारियां शामिल हैं
- अ: कैंसर, किडनी फेल, लिवर फेल, हार्ट सर्जरी, ब्रेन ट्यूमर, फालिज, बड़ा एक्सीडेंट
- ब: ऐसी बीमारी जिसमें अस्पताल में भर्ती होना पड़े और खर्च 50 हजार से ज्यादा हो
- स: संस्था मेडिकल रिपोर्ट देख कर फैसला करेगी कि बीमारी “गंभीर” की कैटेगरी में आती है या नहीं।
- द: पैदाइशी बीमारी, कॉस्मेटिक सर्जरी, बांझपन का इलाज, नशे का इलाज शामिल नहीं है।
(7 स 3) मदद की रकम और हद
- अ: मदद 50 रुपये प्रति Active Member के हिसाब से अपील की जाएगी।
- ब: एक केस में ज्यादा से ज्यादा 2 लाख रुपये तक की अपील की जाएगी।
- स: अगर इलाज का एस्टीमेट 2 लाख से कम है तो सिर्फ उतनी ही रकम की अपील होगी।
- द: अहम नोट: गंभीर बीमारी की सूरत में भी USCF सिर्फ Members से अपील करता है। मदद की आखिरी रकम की कोई गारंटी नहीं देता। जितने Active Member सहयोग करेंगे उतनी ही रकम मरीज को मिलेगी।
- ह: अगर Member सहयोग न करें तो रकम 30-40 हजार भी हो सकती है। इसकी जिम्मेदारी USCF की नहीं होगी।
(7 स 4) दरख्वास्त देने का तरीका
- अ: इत्तिला: मरीज या उसका वारिस 15 दिन के अंदर USCF को व्हाट्सएप, ईमेल या हेल्पलाइन पर इत्तिला दे।
- ब: दस्तावेज: ये कागजात देना जरूरी हैं:
- डॉक्टर का लिखा हुआ नुस्खा + बीमारी की डिटेल
- अस्पताल का एडमिशन कार्ड / एस्टीमेट
- Member का USCF Membership कार्ड
- Member का पहचान पत्र + बैंक पासबुक
- 2 Active Member की तस्दीक
- स: तस्दीक: USCF की टीम 5 से 7 दिन में अस्पताल से तस्दीक करेगी। झूठी रिपोर्ट पर Membership हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी।
- द: अपील: तस्दीक के बाद सभी Active Members को 50 रुपये भेजने की अपील जारी होगी।
- ह: रकम भेजना: हर Member तयशुदा रकम सीधे मरीज के बैंक अकाउंट में भेजेगा।
- व: रसीद: रकम भेज कर https://USCF.in पर ट्रांजैक्शन की रसीद अपलोड करना जरूरी है।
(7 स 5) रकम की गारंटी से मुताल्लिक ऐलान
- हमारी संस्था USCF सिर्फ Members से सहयोग की अपील करती है।
- मदद की रकम कम या ज्यादा होने की कोई गारंटी नहीं है। जितने Active Member सहयोग करेंगे उतनी ही रकम मुतास्सिर Member को मिलेगी।
- USCF रकम जमा करने, अस्पताल में भर्ती करवाने या इलाज करवाने का जिम्मेदार नहीं है। सिर्फ अपील का प्लेटफॉर्म है।
- अगर रकम इलाज के लिए पूरी न हो तो बाकी खर्च मरीज या उसके घर वालों को खुद बर्दाश्त करना होगा।
(7 स 6) अहम उसूल
- अ: एक Member को जिंदगी में ज्यादा से ज्यादा 2 बार गंभीर बीमारी की मदद मिल सकती है।
- ब: दूसरी बार मदद के लिए पहली मदद के बाद कम से कम 3 साल का वक्फा जरूरी है।
- स: अगर मरीज का इलाज सरकारी अस्पताल में मुफ्त हो रहा है तो USCF मदद नहीं करेगा।
- द: इलाज के बाद अगर रकम बच जाए तो वारिस को USCF को वापस करना होगा। वो रकम अगले मरीज के लिए इस्तेमाल होगी।
- ह: महीने में सिर्फ एक केस की मदद होगी। अगर एक महीने में 2 मरीज हो जाएं तो दूसरा केस अगले महीने में लिया जाएगा।
- व: Waiting Member और In-Active Member को गंभीर बीमारी की मदद नहीं मिलेगी।
(7 स 7) गलत दावे पर कार्रवाई
- अ: अगर कोई Member जाली मेडिकल रिपोर्ट लगाता है तो उसकी Membership फौरन खत्म होगी और ली गई रकम वापस लेनी होगी।
- ब: USCF कानूनी कार्रवाई भी कर सकता है।
- स: तस्दीक करने वाले 2 Member की Membership भी खत्म हो सकती है अगर वो जानबूझ कर गलत तस्दीक करें।
(7 स 8) संस्था का फैसला अंतिम
- अ: बीमारी गंभीर है या नहीं, इसका फैसला USCF की मेडिकल कमेटी करेगी।
- ब: कमेटी के फैसले को अदालत में चैलेंज नहीं किया जा सकता।
- स: किसी भी झगड़े का फैसला सिर्फ जिला गोरखपुर की अदालत में होगा।
USCF के इस सहायता अभियान का मकसद है कि सिर्फ पैसों की कमी की वजह से किसी आलिम-ए-दीन की जान न जाए।
(8) अहम उसूल और शर्तें
- अ: 60 साल के बाद का उसूल: 60 साल की उम्र होने के बाद अगर Member का इंतकाल हो जाए तो संस्था मदद नहीं करेगी।
- ब: खास छूट: अगर किसी Active Member ने जिंदगी भर संस्था का साथ दिया हो और 60 साल पूरे होने की वजह से अब Member नहीं है, और उसकी कोई बेटी ऐसी है जिसकी अभी शादी नहीं हुई, तो संस्था उस बेटी की शादी में सहयोग करेगी।
- स: खुदकुशी या जुर्म: Member की खुदकुशी या Member की मौत में वारिस के मुजरिम होने की सूरत में इंतकाल वाली मदद नहीं मिलेगी।
- द: गलत रकम वापसी: अगर किसी ने गलती से ज्यादा रकम भेज दी तो सबूत देने पर वारिस वो रकम 3 कारोबारी दिन में वापस करेगा। मदद से पहले हलफनामा देना जरूरी है।
- ह: नॉमिनी लोगों में झगड़ा: Member 2 नॉमिनी रख सकता है। झगड़ा होने पर संस्था खुद फैसला करेगी।
- व: संस्था का फैसला अंतिम: सभी मामलों में जांच और फैसला संस्था खुद करेगी। उसे अदालत में चैलेंज नहीं किया जा सकता।
- ज़: अदालती इलाका: किसी भी कानूनी झगड़े का फैसला सिर्फ जिला गोरखपुर की अदालत में होगा।
द: कानूनी केस में मदद
शर्त: Member का “Active” होना + संस्था की जांच
नोट: सिर्फ झूठे मुकदमे की सूरत में सहायता अभियान चलाया जाएगा।
कानूनी केस में मदद कैसे होगी?
(7 द 1) बुनियादी शर्तें
- अ: Member का Active Member होना जरूरी है।
- ब: Member ने पिछले 12 महीने में 90 प्रतिशत सहायता अभियानों में सहयोग किया हो।
- स: मुकदमा झूठा, सियासी या मजहबी नफरत की वजह से दर्ज हुआ हो।
- द: Member की उम्र 60 साल से कम हो।
- ह: Member खुद मुजरिम न हो। अगर Member वाकई जुर्म में शामिल है तो मदद नहीं मिलेगी।
(7 द 2) कौन से केस शामिल हैं ?
- अ: झूठा आतंकवाद का इल्जाम, झूठा फिरकावाराना मुकदमा
- ब: मस्जिद, मदरसा या दीनी काम की वजह से दर्ज हुआ झूठा केस
- स: पुलिस या प्रशासन की ज्यादती का शिकार होना
- द: सोशल मीडिया पोस्ट या तकरीर की वजह से झूठा FIR
- ह: जाती लड़ाई, मारपीट, चोरी, ज़िना, नशा और जमीन-जायदाद के केस शामिल नहीं हैं।
(7 द 3) मदद की रकम और हद
- अ: मदद 50 रुपये प्रति Active Member के हिसाब से अपील की जाएगी।
- ब: एक केस में ज्यादा से ज्यादा 1,50,000 रुपये तक की अपील की जाएगी।
- स: अगर वकील की फीस 1.5 लाख से कम है तो सिर्फ उतनी ही रकम की अपील होगी।
- द: अहम नोट: झूठे मुकदमे की सूरत में भी USCF सिर्फ Members से अपील करता है। मदद की आखिरी रकम की कोई गारंटी नहीं देता। जितने Active Member सहयोग करेंगे उतनी ही रकम मिलेगी।
- ह: अगर Member सहयोग न करें तो रकम 20-30 हजार भी हो सकती है। इसकी जिम्मेदारी USCF की नहीं होगी।
(7 द 4) दरख्वास्त देने का तरीका
- अ: फौरी इत्तिला: गिरफ्तारी या FIR के 3 दिन के अंदर USCF को व्हाट्सएप, ईमेल या हेल्पलाइन पर इत्तिला दें।
- ब: दस्तावेज: ये कागजात देना जरूरी हैं:
- FIR की कॉपी
- गिरफ्तारी वारंट या नोटिस
- Member का पहचान पत्र
- 2 Active Member की लिखित गवाही कि केस झूठा है
- स: जांच: USCF की कानूनी कमेटी 3 से 5 दिन में वकील के जरिए जांच करेगी।
- द: अपील: जांच में केस झूठा साबित होने पर सभी Active Members को 50 रुपये भेजने की अपील जारी होगी।
- ह: रकम भेजना: हर Member तयशुदा रकम सीधे Member या उसके वकील के बैंक अकाउंट में भेजेगा।
- व: रसीद: रकम भेज कर https://USCF.in पर ट्रांजैक्शन की रसीद अपलोड करना जरूरी है।
(7 द 5) रकम की गारंटी से मुताल्लिक ऐलान
- अ: मदद की चारों सूरतों में – इंतकाल, शादी, बीमारी, झूठा मुकदमा – USCF सिर्फ Members से अपील करता है।
- ब: मदद की रकम कम या ज्यादा होने की कोई गारंटी नहीं है। जितने Active Member सहयोग करेंगे उतनी ही रकम मुतास्सिर Member को मिलेगी।
- स: USCF रकम जमा करने, वकील करवाने या केस जितवाने का जिम्मेदार नहीं है। सिर्फ अपील का प्लेटफॉर्म है।
- द: अगर रकम पूरी न हो तो Member को बाकी खर्च खुद बर्दाश्त करना होगा।
(7 द 6) अहम उसूल
- अ: एक Member को जिंदगी में सिर्फ 1 बार झूठे मुकदमे की मदद मिलेगी।
- ब: अगर बाद में साबित हो जाए कि Member वाकई मुजरिम था तो ली गई पूरी रकम 30 दिन में USCF को वापस करनी होगी।
- स: वकील का चुनाव USCF की कानूनी कमेटी करेगी। Member अपनी मर्जी का वकील नहीं रख सकता।
- द: अगर Member जमानत पर रिहा हो कर भाग जाए तो उसकी Membership हमेशा के लिए खत्म और कानूनी कार्रवाई होगी।
- ह: महीने में सिर्फ एक कानूनी केस की मदद होगी।
- व: Waiting Member और In-Active Member को कानूनी मदद नहीं मिलेगी।
- ज़: जमीन, जायदाद, विरासत या माली लेन-देन के मुकदमे पर USCF कोई मदद नहीं करेगा।
(7 द 7) गलत दावे पर कार्रवाई
- अ: अगर Member जानबूझ कर झूठा केस “झूठा” बता कर मदद लेता है तो Membership फौरन खत्म होगी।
- ब: ली गई रकम 15 दिन में वापस करनी होगी वरना USCF कोर्ट केस करेगा।
- स: तस्दीक करने वाले 2 Member पर भी कार्रवाई हो सकती है अगर वो गलत गवाही दें।
(7 द 8) संस्था का फैसला अंतिम
- अ: केस झूठा है या सच्चा, इसका फैसला USCF की 3 Member वाली कानूनी कमेटी करेगी।
- ब: कमेटी में 1 वकील, 1 आलिम-ए-दीन, 1 USCF पदाधिकारी होगा।
- स: कमेटी के फैसले को अदालत में चैलेंज नहीं किया जा सकता।
- द: किसी भी झगड़े का फैसला सिर्फ जिला गोरखपुर की अदालत में होगा।
USCF के इस सहायता अभियान का मकसद है कि किसी आलिम-ए-दीन को झूठे केस में फंसा कर कोई उनकी और उनके खानदान की जिंदगी बर्बाद न कर सके।
जरूरी वजाहत
इंतकाल के अलावा तीनों सूरतों यानी बेटी की शादी, गंभीर बीमारी, झूठा मुकदमा हर केस में ज्यादा से ज्यादा सहायता रकम पहले से तय है:
- शादी: 2,50,000 रुपये
- गंभीर बीमारी: 2,00,000 रुपये
- झूठा मुकदमा: 1,50,000 रुपये
जैसे ही Active Members के सहयोग से तयशुदा रकम पूरी हो जाएगी, फौरन USCF की वेबसाइट और ऐप के “मदद बॉक्स” में मुतास्सिर Member के बजाय संस्था USCF के सरकारी बैंक अकाउंट की डिटेल अपलोड कर दी जाएगी।
उसके बाद आने वाली सभी रकम USCF के अकाउंट में जमा होगी। ये रकम जरूरत से ज्यादा मानी जाएगी।
जरूरत से ज्यादा जमा हुई रकम को USCF “केंद्रीय सहायता फंड” में रखेगा और अगले मंजूरशुदा केस में एकमुश्त मुतास्सिर Member को भेज देगा।
मकसद: बार-बार छोटी-छोटी रकम भेजने के बजाय एक बार में पूरी रकम मुतास्सिर को मिल जाए और निजाम तेज हो।
इंतकाल की सूरत में:
इंतकाल पर मदद की ज्यादा से ज्यादा की कोई हद तय नहीं है। इसलिए “मदद बॉक्स” तयशुदा मुद्दत तक खुला रहेगा। आम तौर पर इंतकाल की इत्तिला के बाद 30 दिन तक या कमेटी के फैसले तक।
इन 30 दिनों में जितनी भी रकम जमा होगी वो सीधे मरहूम Active Member के वारिस के अकाउंट में जाती रहेगी।
मुद्दत पूरी होने के बाद मदद बॉक्स बंद कर दिया जाएगा।
मकसद: मरहूम के वारिसों की ज्यादा से ज्यादा मदद हो सके क्योंकि ये सबसे बड़ा सदमा होता है।
नोट:
USCF के अकाउंट में जमा होने वाली हर रकम का हिसाब वेबसाइट पर लाइव दिखाया जाएगा।
“केंद्रीय सहायता फंड” से जब भी किसी केस में रकम भेजी जाएगी, उसकी रसीद और डिटेल सभी Members को नजर आएगी।
(9) गलत प्रचार पर कार्रवाई
- अ: अगर कोई Member USCF के खिलाफ गलत बात या अफवाह फैलाता है तो उसकी Membership खत्म कर दी जाएगी और कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।
- ब: अगर कोई Member संस्था के किसी पदाधिकारी से बदतमीजी करे या संस्था के खिलाफ काम करे तो उसकी Membership खत्म की जा सकती है।
(10) सालाना 51 रुपये कहां खर्च होंगे ?
- वेबसाइट, ऐप बनाने और चलाने में।
- दफ्तर के इंतजाम में।
- स्टाफ की तनख्वाह में।
- मरहूम की तस्दीक के लिए।
- फोरम के प्रचार में।
- जरूरतमंद उलमा और मदरसों की मदद में।
- दीनी प्रोग्राम और संस्था के फायदे के कामों में।
(11) संपर्क / हेल्पलाइन
Members की मदद के लिए हेल्पलाइन नंबर, व्हाट्सएप और ईमेल जारी की गई है।
इन पर संपर्क करके जानकारी और तकनीकी मदद ली जा सकती है।
USCF “एक के लिए सब, सब के लिए एक” का निज़ाम है। हर मेंबर महीने में सिर्फ 50 रुपये दे कर किसी आलिम के घर का बड़ा मसला हल कर सकता है चाहे बेटी की शादी हो, सख्त बीमारी हो, झूठा मुकदमा हो या फिर किसी आलिम के इंतेकाल के बाद उनके परिवार का खर्च।